Ek bahas Pyaari si

एक फूलो और फलों से लदा हुआ पेड़ अपने हर अंगो का बखान एक जाते हुए राहगीर से कर रहा था丨
उसने एक राहगीर से पूछा बताओ हमारे फूल अति प्रिय है या छाया देती हुई टहनियाँ और उनकी हरी भरी पत्तिया किसी एक के बारे में बताना पड़ेगा कौन श्रेष्ठ है丨
राहगीर बोलै वैसे तो तुम सारे ही श्रेष्ठ सुन्दर हो आते जाते सबका मन मोह लेने वाले हो तुम्हारे फल सबका पेट भरने वाले है तुम्हारे फूल आते जाते सबके आकर्षण का कारण है丨
चलते हुए राहगीरों के लिए भरपूर छाया  देने वाली ऐ पत्तिया पथिको के लिए वरदान है丨मुझे तो सारे किरदार बराबर दिखते है एक दूसरे के अभाव में तुम अकेले और निर्रथक हो बोला丨
राहगीर ने हँसते  हुए वापस पेड़ से पूछा तुम तो अपने जनक को भूल गए जो तुम्हे सालो से अपनी पीठ पर लेकर सर्दी गर्मी बारिश सब झेल रहा है| और तुम्हे जमीन से जुड़े और खड़े रहने की ताकत दे रहा हैI  शायद असल जिंदगी में हम भी ऐसा ही केर रहे है अपने जनक को भूल बैठे है जैसे जड़ उतनी लुभावनी और मनमोहक नहीं दिखती| उसी प्रकार हमारे माता पिता हमारी दृष्टि  में हमें उतने सक्षम नहीं दिखते जिस प्रकार पेड़ को अपनी जड़ नहीं दिख रही थी |
丨यही तो है हमारे पतन का छोटा सा कारण 丨

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